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 मानुवाद और विमर्श निर्माण   Narrative का निर्माण कैसे किया जाता है इस बात को थोड़ा गहराई से समझने की आवश्यकता है कुछ बातें और नारे जो एकदम सामान्य लगते हैं जिन्हें सुनकर यही लगता है कि सही तो है क्या फर्क पड़ता है यह बोल दिया गया, कह दिया गया तो, क्या हो गया? पर इसके अर्थ बड़े व्यापक होते हैं और आम लोगों को प्रभावित करते हैं और जाने-अनजाने में लोग इन्हें अपना लेते हैं और उनका विचार उसी तरफ बढ़ने लग जाता है, सोचने देखने का नजरिया उसी खास दिशा में चलने लग जाता है अर्थात सोचने कि दिशा कौन सी होगी यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्तियों कि चिंतन प्रक्रिया का निर्माण कैसे किया गया है और निर्माण प्रक्रिया भविष्य में कौन से लोग कैसे होंगे तय करता है।     अब जैसे ब्राह्मणवाद, मनुवाद इन शब्दों को आप देखेंगे तो ऐसा लगेगा कि जैसे एक खराब व्यवस्था जिसमें तमाम खामियां हैं और इन शब्दों के माध्यम से उनका विरोध किया जा रहा है और यह उन्हीं के प्रतीक हैं, जो शोषक हैं, जो वंचितों के खिलाफ हैं, लेकिन हकीकत में यह शब्द हिंदू परंपरा, भारतीय परंपरा के विरोध में स्वर देने के लि...

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